"चलो ना खुद ही गिरा दे ,हम इन दीवारों को,
जिन्होंने हमको रिवाज़ो में गिरफ्तार किया,"
मेरे साजन ने हमसे ये जुमला कह के मेरी हसरत का बेरहमी से इस्तेमाल किया,
एक दीप जो जल -जल के सौ बार बुझा
उस दीप की रौशनी में दिल का कारोबार किया,
एक हल्के से हवा के झोके को भी ,जो सह न सका
दिल की महफ़िल ने उसके उजालो पे ऐतबार किया ,
वो जिनके लिए हमने तोड़ दी रस्मे ,
उन्होंने रस्मो के नाम पर हमको, गुनहगार किया,
फिर एक नये दर्द को औज़ार बना कर लोगो ,
भरे बाजार सबसे मिल के, हम पे खुद पत्थर मारे,
और फिर छुप के सबसे इश्क़ का मलहम ले कर,
प्यार का दावा किया फिर अश्क़ो की गहरी बारिश
उफ़ !फिर हमे अपना कहा, फिर हाथ जोड़े
और फिर, मुस्कुरा के भूल जाने का वादा ले कर
वह चले गए कभी न मिलने का वादा दे कर।
शिखानारी
शिखानारी
