ओ एहसासो! रुक जाओ ना
ओ ग़मखारो! ,अब जाओ ना ,
हर वादे को छोड़ चुके है
हम उनका दिल तोड़ चूके है,
अब क्यों है? ये शब्दों की बारिश
अब हम छाता ,खोल चुके है ,
दुनिया के ,तंजो के पत्थर
यादो के, सर फोड़ चुके है ,
कहां ? अब हमे राह मिलेगी
भंवर में , कश्ती मोड़ चुके है,
नहीं चाहिए, अब कोई घर
जीवन चिन्तन, छोड़ चुके है,
खाली हाथो में, टूटा दिल,
हम धोखो ,से जोड़ चुके है ,
बस यूँही ,खुद से शर्मिन्दा
खुद से ,नाता तोड़ ,चुके है.
ओ ग़मखारो! ,अब जाओ ना ,
हर वादे को छोड़ चुके है
हम उनका दिल तोड़ चूके है,
अब क्यों है? ये शब्दों की बारिश
अब हम छाता ,खोल चुके है ,
दुनिया के ,तंजो के पत्थर
यादो के, सर फोड़ चुके है ,
कहां ? अब हमे राह मिलेगी
भंवर में , कश्ती मोड़ चुके है,
नहीं चाहिए, अब कोई घर
जीवन चिन्तन, छोड़ चुके है,
खाली हाथो में, टूटा दिल,
हम धोखो ,से जोड़ चुके है ,
बस यूँही ,खुद से शर्मिन्दा
खुद से ,नाता तोड़ ,चुके है.
शिखानारी
