जीवाधार
उन्मुक्त हवा हूँ मैं कोई या, अहसासों की आंधी हूँ
सपनो में रहनेवाली मैं ,एक राजा की एक रानी हूँ,
सपनो में रहनेवाली मैं ,एक राजा की एक रानी हूँ,
अक्सर पास किनारे के खुद, अपनी नाव डुबोती हूँ
मुझको तुम थाम ही लोगे इस सपने में, जीती हूँ ,
तेरी मीठी बातो से अपने, बीते जख्मो को धोती हूँ
क्यूँ गम उजड़े घर का जब तुम आधार बनोगे,
बुझता है तो बुझ जाए अब दिया चंद यादो का
तुम टूटी कश्ती की मेरी क्या अब पतवार बनोगे ?
हर तूफान थाम कर तुझको मैं सजना सह लूंगी,
क्यूँ गम उजड़े घर का जब तुम आधार बनोगे,
बुझता है तो बुझ जाए अब दिया चंद यादो का
तुम टूटी कश्ती की मेरी क्या अब पतवार बनोगे ?
हर तूफान थाम कर तुझको मैं सजना सह लूंगी,
तेरा हाथ थाम पिया भव सागर ,पार करुँगी
कैसे डूबेगी ये नैया जब तुम धार बनोगे,
अब तम से हम युद्ध लड़ेंगे अब खुशियों को ,जीत ही लेंगे
क्या मालूम था मुझ मुफ़लिस का, तुम संसार बनोगे,
सूनी मेरी मांग सजा कर मेरा, ऐतबार बनोगे
बोलो न क्या मेरे सुखद अंत का तुम 'जीवाधार' बनोगे।
शिखानारी
कैसे डूबेगी ये नैया जब तुम धार बनोगे,
अब तम से हम युद्ध लड़ेंगे अब खुशियों को ,जीत ही लेंगे
क्या मालूम था मुझ मुफ़लिस का, तुम संसार बनोगे,
सूनी मेरी मांग सजा कर मेरा, ऐतबार बनोगे
बोलो न क्या मेरे सुखद अंत का तुम 'जीवाधार' बनोगे।
शिखानारी
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