अच्छे हैं हम सुन के तुम बीमार हो गए
इक पल में क्या से क्या ऐ! मेरे यार हो गए,
जिन दोस्तों पे था ख़ुद से भी ज़्यादा मुझे यकीन
मेरे ख़िलाफ वो ही दोस्त कई बार हो गए,
जब से मैँ अपने आपको करने लगी पसन्द
उनकी नज़र में तब ही से हम बेकार हो गए,
अच्छा किया जो आपने आवाज़ दी हमे
बरसों से सो रहे थे हम भी खबरदार हो गए,
बिन दोस्तों के जीने की आदत ना थी हमे
सब जान के भी इसलिए अनजान हो गए ,
पर अब कैसे ना कहे धोखा है दोस्ती
इस दोस्ती पे कुर्बान सरे बाजार हो गए ,
मेरे ही इश्क़ को आपने अपना बना लिया
मेरी हंसी को दर्द का दरिया बना दिया ,
मेरी ख़ुशी को अपने ज़ीने का जरिया बना लिया
मुझसे ही ले के खँजर विश्वास को मारा ,
हम दोस्ती पे तुमसे आज शर्मसार हो गए
दोस्ती हम आज दोस्तों से बेज़ार हो गए।
shikhanaari
shikhanaari
