बड़े जालिम है यहाँ लोग ,मुझे डर लगने लगा है
मेरा भरोसा मुझ पे ही वार, करने लगा है ,
मै सोचती रही की सब इंसान ही होंगे
उनके भी दिल में प्यार के अरमान ही होंगे,
अफ़सोस हर कोई यहाँ ,एक दूसरे को छलने लगा है
सबके ही जज्बातों का ,रंग अब बदलने लगा है ........,
वो जिसको गुनाह कहती थी, रिश्तो की हुकूमत ,
वो गुनाह सुरूर बन के रिश्तो में, उतरने ही लगा है
माँ कौन है ?बेटी कहाँ बीवी बहू कहाँ ?
देख के अखबार की ताज़ा सी ये खबरे
एक बाप जो बेटी से इश्क़ करने लगा है ,
भाई का दिल बहना पे तक, मचलने लगा है
अब कोई नहीं है बहू ,बेटी ना बहन भी ,
माँ का दिल बेटे को भी अब, छलने लगा है
दिल मेरा रोज़ ख़ुदकुशी सी करने लगा है ,
रिश्तो का खंजर परम्परा को ही, कतरने लगा है
बड़े जालिम है यहाँ लोग ,मुझे डर लगने लगा है
मेरा भरोसा मुझ पे ही वार, करने लगा है
पहनावे से ही नहीं अहसासों से भी हर शख्स , अब बदलने लगा है,
ए काश !ना बदलती रूह की पाकीज़गी
मेरे खुदा इंसान खुद इंसानियत का खून करने लगा है,
शिखानारी
मेरा भरोसा मुझ पे ही वार, करने लगा है ,
मै सोचती रही की सब इंसान ही होंगे
उनके भी दिल में प्यार के अरमान ही होंगे,
अफ़सोस हर कोई यहाँ ,एक दूसरे को छलने लगा है
सबके ही जज्बातों का ,रंग अब बदलने लगा है ........,
वो जिसको गुनाह कहती थी, रिश्तो की हुकूमत ,
वो गुनाह सुरूर बन के रिश्तो में, उतरने ही लगा है
माँ कौन है ?बेटी कहाँ बीवी बहू कहाँ ?
देख के अखबार की ताज़ा सी ये खबरे
एक बाप जो बेटी से इश्क़ करने लगा है ,
भाई का दिल बहना पे तक, मचलने लगा है
अब कोई नहीं है बहू ,बेटी ना बहन भी ,
माँ का दिल बेटे को भी अब, छलने लगा है
दिल मेरा रोज़ ख़ुदकुशी सी करने लगा है ,
रिश्तो का खंजर परम्परा को ही, कतरने लगा है
बड़े जालिम है यहाँ लोग ,मुझे डर लगने लगा है
मेरा भरोसा मुझ पे ही वार, करने लगा है
पहनावे से ही नहीं अहसासों से भी हर शख्स , अब बदलने लगा है,
ए काश !ना बदलती रूह की पाकीज़गी
मेरे खुदा इंसान खुद इंसानियत का खून करने लगा है,
शिखानारी
