दोस्ती किस तरह निभाते हैं,
मेरे दुश्मन मुझे सिखाते हैं।
नापना चाहते हैं दरिया को,
वो जो बरसात में नहाते हैं।
ख़ुद से नज़रें मिला नही पाते,
वो मुझे, जब भी आजमाते हैं।
ज़िन्दगी क्या उन्हें डराएगी ,
जो जश्न मौत का मनाते हैं।
हमे वास्ता दे के अपने, होने का
कभी आते है कभी, जाते है,
वो नहीं जानते मेरी ,हस्ती!
हम तो कांटो में घर ,बनाते है।
शिखानारी
मेरे दुश्मन मुझे सिखाते हैं।
नापना चाहते हैं दरिया को,
वो जो बरसात में नहाते हैं।
ख़ुद से नज़रें मिला नही पाते,
वो मुझे, जब भी आजमाते हैं।
ज़िन्दगी क्या उन्हें डराएगी ,
जो जश्न मौत का मनाते हैं।
हमे वास्ता दे के अपने, होने का
कभी आते है कभी, जाते है,
वो नहीं जानते मेरी ,हस्ती!
हम तो कांटो में घर ,बनाते है।
शिखानारी
