विरह
"हाथो "पे लिखी किस्मत , लम्हो की ठिठोली है
चांदनी गुमसुम सी रात कुछ ज्यादा ही अकेली है
चांदनी गुमसुम सी रात कुछ ज्यादा ही अकेली है
बिखरे, हुए सपनो में खून की लाली है
आंखे ये मधुशाला पर,सपनो से खाली है ,
खिलते हुए गुलशन है, बिछड़े हुये माली है
हालत की बदली ये ,हम दोनों पे बरसी है,
ख्वाब उनके भी घायल है, मेरी रूह भी जख्मी है
बिखरे हुए लम्हे है, टूटी हुयी साँसे है ,
इस तरह ये जुदाई हर रूह पे भारी है।
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एक फूल मुस्कुराया खुशबु से भर गया
किस्मत का करिश्मा पर डाली से गिर गया।
शिखानारी
किस्मत का करिश्मा पर डाली से गिर गया।
शिखानारी