माँ
माँ तो माँ है, कैसे क्या विवरण दू माँ का ?
दिल के सारे ,एहसासो का कर दू मिश्रण
सारे त्याग दर्द और ,ख़ुशियों का वो चूरन ,
हर जख्म पर माँ के, आँसू के वो मलहम ,
मेरी हर इच्छा ही ,मेरी माँ का अर्चन,
मैं सोचू उससे भी, पहले सुन लेती है ,
मेरी हर मुश्किल को, माँ हल कर देती है ,
माँ है तो मैं कहाँ अकेला ,
माँ ही है खुशियों का मेला,
उसकी मन्नत में भी बस मैं,
उसकी जन्नत भी बस मैं ही मैं ,
उसका गुरुर मैं ,जीवन सुरूर मैं
जब माँ के आँचल में, छुप जाता हूँ ,
माँ के आशीर्वादों से ,हिम्मत पाता हूँ ,
तूफ़ानो से तनहा ही मैं, भिड जाता हूँ ,
जीत के फिर माँ के चरणों में, आ जाता हूँ ,
माँ के कदमो में ही मोक्ष, मिलेगा सबको,
निर्विवाद विश्वास पूर्ण "जननी" हम सबकी ,
"माँ" का विवरण दे पाए, इतनी सशक्त नहीं मेरी ये लेखनी।
शिखानारी
शिखानारी
