इश्क़ के दाम
मौत के पास जा के देखा है जी हां "
हमने भी दिल लगा के देखा है ,
दूर से देखते है लोग चाँद को लेकिन "
हमने तो घर बुला के देखा है ,
इश्क़ के दाम पूछ लो हमसे क्यूंकि"
हमने तो खुद को यूँही लुटा के देखा है ,
प्यार! कब भीख में मिला लोगो वैसे !
हमने भी दामन फैला के,देखा है
वह धड़कता है मेरे दिल में धड़कनो की तरह ,
मैंने उसको भुला के देखा है ,
वो चला गया दुनिया से मगर ,
पहला प्यार दिल से कँहा मिटता है ,
हमने तो खुद को जला के देख लिया ,
जिस्म जलने पर भी
प्यार का दाग साफ़ -साफ़ रूह पे भी दिखता है ,
हमने कशिशे लाख की मिटाने की ,
पर इश्क़ !छुपाने से भला ऐसे कंहा छुपता है।
शिखानारी
हमने कशिशे लाख की मिटाने की ,
पर इश्क़ !छुपाने से भला ऐसे कंहा छुपता है।
शिखानारी
