आज खुशियाँ बांटे
लो चलो आज खुशियाँ बांटे ,ग़मो के बोझ किनारे रक्खे
टुकड़ो में बटी हर छोटी- बड़ी खुशियों, के टुकड़े बीने,
गजरो में सजाये या हर ख़ुशी की याद की माला बनाये
इस माला का धागा, रिश्तो सा मजबूत हो,
फिर इन्हे रंगीन यादो के मोतियो से सजाये,
इनमे भरे खुशियों के अहसासों की खुशबुएँ ,
क़ुछ सूनहरे क़हक़हे भी इनमे लगाए
देख कर ये प्रेम माला ,सारे ख़ुशी के विस्मृत क्षण
सभी को याद आये,
लोग स्मृतियों पे अपनी मुस्कुराये
लोग स्मृतियों पे अपनी मुस्कुराये
कोई भी दर्द की ना याद हो बस,
मुस्कुराता सा नगर आबाद हो.
शिखानारी
मुस्कुराता सा नगर आबाद हो.
शिखानारी
