भर्मर सजन
उसके गुंजन को वो इकरार क्यों समझा ?,
भँवरा ! तो उड़ गया नए फूल की धुन में
मासूम सा वो पुष्प आदत को ऐतबार क्यों समझा ?,
तन्हाई में रहने लगा उसके इंतज़ार में
सबसे अलग वो गया काफिर के प्यार में,
सबसे अलग वो गया काफिर के प्यार में,
इसी इंतज़ार में आएगा भर्मर, आएगा उसके प्यार में
वो जिंदगी के इस पार से उस पार हो गया,
और भर्मर को पता तक ना चला
कौन ?उसकी चाहत में फना हो के ,
इस तरह तार तार हो गया
एक बार फिर कोई इश्क़ क़र लाचार हो गया.
शिखानारी
इस तरह तार तार हो गया
एक बार फिर कोई इश्क़ क़र लाचार हो गया.
शिखानारी
