कश्ती न डूब जाये वादों के सहारो पर
पतवार की जरुरत अब हमको किनारो पर ,
एक गुल नया खिला है उजड़े से ,चिनारों पर
खुशबू कही नहीं है मुझे शक है, बहारो पर ,
खाओ तुम भी तरस खाओ हम ख्वाहिशे, मारो पर।
कुदरत की मेहर मुझ पर नज़रे है ,मीनारों पर
मेरा घर नया बना है हां छुप के, सितारों पर,
आती है शर्म मुझको बेवक़्त, खुमारो पर
तोड़ी है कसम हमने तेरे ही, इशारो पर,
अब डूब के ही कश्ती पहुंचेगी, किनारो पर
खाओ तुम भी तरस खाओ हम ख्वाहिशे, मारो पर।
है लाखो शुबहा मुझको बे मौसम की ,बहारो पर ,
मत पोछो मेरे आँसू बहने दो ,बेचारो को
नज़रे लगी है सबकी तेरे ही, इशारो पर ,
होता नहीं भरोसा खुशियों के, नज़ारो पर
कही फिर ना अँधेरा हो किस्मत के, सितारों पर,
खाओ तुम भी तरस खाओ हम, ख्वाहिशे मारो पर।
शिखानारी
शिखानारी
