सौतन का घर
हर तरफ शोलो के दरिया सूखते हसरत के फूल
कितने धूमिल चित्र है हर तरफ यादो की धूल ,
सपना सुहाना समझ कर सोचा एक घर बनाले
एक गुल की जुस्तजू में ,लाखो कांटे दिल ने संभाले ,
भूल कर हर गम जो फिर से, घर सजाते है
देखिये हादसे जिंदगी में क्या खूब आते है ,
हमने सच्चे मोतियों से घर बनाया पर
लेने यहाँ सकून लोग पर कुछ और आते है ,
मेरे साजन दुश्मनो से दिल लगाते है
और हम तनहा नए सपने सजाते है ,
फूल यादो के, ज़रा बासी लगे तो हम
तोड़ के दिल अरमान ताज़े फिर लगाते है,
साजना को भाती नहीं खुशबुएँ मेरे सपनो की
इसलिए वो नये घर में जरा, कुछ कम ही आते है,
हम नादान से सब कुछ तोड़ फोड़ के
अपने साजन को लुभाने ,
फिर नया कोई गुर आज़माते है
उफ़, मगर किसमत की फिर भी हार जाते है ,
अहसास सारे मर चुके है उनके चाहत में
इसलिए
हार कर खाली हाथ तन्हा "जिंदगी में अकेले लौट जाते है।
शिखानारी
कितने धूमिल चित्र है हर तरफ यादो की धूल ,
सपना सुहाना समझ कर सोचा एक घर बनाले
एक गुल की जुस्तजू में ,लाखो कांटे दिल ने संभाले ,
भूल कर हर गम जो फिर से, घर सजाते है
देखिये हादसे जिंदगी में क्या खूब आते है ,
हमने सच्चे मोतियों से घर बनाया पर
लेने यहाँ सकून लोग पर कुछ और आते है ,
मेरे साजन दुश्मनो से दिल लगाते है
और हम तनहा नए सपने सजाते है ,
फूल यादो के, ज़रा बासी लगे तो हम
तोड़ के दिल अरमान ताज़े फिर लगाते है,
साजना को भाती नहीं खुशबुएँ मेरे सपनो की
इसलिए वो नये घर में जरा, कुछ कम ही आते है,
हम नादान से सब कुछ तोड़ फोड़ के
अपने साजन को लुभाने ,
फिर नया कोई गुर आज़माते है
उफ़, मगर किसमत की फिर भी हार जाते है ,
अहसास सारे मर चुके है उनके चाहत में
इसलिए
हार कर खाली हाथ तन्हा "जिंदगी में अकेले लौट जाते है।
शिखानारी
