इश्क़ की इज़ाज़त
ना जाने क्या हुआ है सिर्फ, तुमको चाहती हूँ मैँ
अपनी इस कमी को सनम पहचानती हूं मैं,
उसे क्यों तस्वुर मेँ कभीं, आनें नहीं देती
तेरी परछाइयो को ही अपना खुदा मानती हूँ मैँ,
मुझे तुम माफ़ !कर देना जरा इन्साफ कर देना
तेरा मैँ प्यार दूँ उसकों इज़ाज़त मांगती हूँ मैँ,
अगर तुम आ नहीं सकते, मुझें खुद तक बुला लो तुम
मेरे बहके हुए मन को, सीने से लगा लो तुम,
या फिर इतना हीं कर दो ना भटकने से बचा लो तुम
गर मुमकिन ना हो ये भी मुहब्बत को ही ले जाओ,
नहीं तो उसको जब सोचू तसव्वुर में तुम्ही आओ
मेरी नींदे उड़ा दो या मेरे ख्वाबो पे छा जाओ,
धड़कता दिल ये कहता है मुझे खुद में छुपा लो तुम
मेरी इस बेवफाई को वफ़ा फिर से बना दो तुम,
मेरी हस्ती को दुनिया से मेरे साजन मिटा दो तुम,
जरा मुझ पर तरस खाओ मुझे मुक्ति दिला दो तुम.
शिखानारी
ना जाने क्या हुआ है सिर्फ, तुमको चाहती हूँ मैँ
अपनी इस कमी को सनम पहचानती हूं मैं,
उसे क्यों तस्वुर मेँ कभीं, आनें नहीं देती
तेरी परछाइयो को ही अपना खुदा मानती हूँ मैँ,
मुझे तुम माफ़ !कर देना जरा इन्साफ कर देना
तेरा मैँ प्यार दूँ उसकों इज़ाज़त मांगती हूँ मैँ,
अगर तुम आ नहीं सकते, मुझें खुद तक बुला लो तुम
मेरे बहके हुए मन को, सीने से लगा लो तुम,
या फिर इतना हीं कर दो ना भटकने से बचा लो तुम
गर मुमकिन ना हो ये भी मुहब्बत को ही ले जाओ,
नहीं तो उसको जब सोचू तसव्वुर में तुम्ही आओ
मेरी नींदे उड़ा दो या मेरे ख्वाबो पे छा जाओ,
धड़कता दिल ये कहता है मुझे खुद में छुपा लो तुम
मेरी इस बेवफाई को वफ़ा फिर से बना दो तुम,
मेरी हस्ती को दुनिया से मेरे साजन मिटा दो तुम,
जरा मुझ पर तरस खाओ मुझे मुक्ति दिला दो तुम.
शिखानारी
