अलविदा
वो कुछ मजबूरिया थी मेरी मैं बेवफा नहीं ,
हो लहज़ा तल्ख! बहुत मेरा
पर मैं खुद तल्ख़! नहीं
पर मैं खुद तल्ख़! नहीं
ये जिंदगी अपनी कुछ इस तरह से ही गुज़री ,
जीने का मुझमे में बाकी अब कुछ भी सलीका नहीं ,
गर्दिशे जिंदगी में पाया तो बहुत कुछ ,
पर दिल ने माँगा जिसे सिर्फ वो ही हमारा नहीं
कुछ रिश्तो की मजबूरियाँ थी,कुछ रस्मो की दीवारे भी ,
करना शिकवा किस्मत से हमको अब भी गवारा नहीं
एक शख्स को माँगा था, हमने दुआ में ,
हाथ ,उसके बाद दुआ को दिल अब तक उठा ना सका
कसम खायी थी साथ निभाने की उस जन्म तक ,
हद ! ये है हमारी बदकिस्मती की वो
दो कदम भी, साथ अपना निभा ना सका,
दो कदम भी, साथ अपना निभा ना सका,
बेवफा नहीं था वो बस तकदीर के वार से
बेचारा खुद को मौत से बचा ना सका नहीं ,
बेचारा खुद को मौत से बचा ना सका नहीं ,
वो चला गया हमको अलविदा भी ना कहा
फिर आज तक कोई हमको फिर हंसा सका नहीं ,
.ऐसा नहीं की अब हम मुस्कुराते नहीं ,
कब कहा, हमने की वो स्वप्नों में आते नहीं ---------------
शिखानारी
शिखानारी
