संगीत
रंग भरे नगमो से,बेरंग दिल में रंग भर तो लू ,
पर क्या करु? राग मेरा साज़ से मिलता नही है
लय तान शब्द सब के सब बे ताल से हैं,
जो थिरक उठे मेरी आवाज़ पर
कितना ढूंढा वो कही मिलता नही है,
गगन भेदी स्वर लगाऊँ तू कहे तो गीत गाऊँ
पर मेरे संगीत की मधुता चुरा कर ,
मेरे गीतों की अथाह सरिता चुरा कर
अनंत इस अनुराग में मुझ को डुबा कर
खुद कही शांत से कमरे में जा कर ,
मेरे ही गीतों को नए कुछ रंग दे कर
अपने रागों में उन्हें तू गा रहा है ,
खुश हूँ मैं साजन मेरे तू, दूर तो है
पर राग तेरे गीतों का मुझ पर छा रहा है ,
विरह को मैं भूल कर जोगन से जुगनी हुयी हूँ
हर कोई सुन ले तेरी आवाज़ को ,
मुमकिन नही सब जान ले इस राज को
तू फना हो चुका है इश्क़ में ,
राख तेरी मिल चुकी है धूल में
ज़र्रे ज़र्रे में मगर तू जी रहा है,
साँसों से मेरी तू रूह तक जा चूका है ,
मेरी रूह में ही छुप के कही तू मिलन के गीत सजना गा रहा है।
shikhanaari
shikhanaari
