दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Wednesday, 15 March 2017

प्रकृति "परी"

प्रकृति "परी" 
  बैरन कहू या तुझें संगिनी! 
लो आई नहा के " प्रकृति परी", 
कभी सूखे पेड़ो को जीवन दिया 
कभी बस्तिया तूने वीरान की ,
कभी उपवनो में  खुशबु  सी उड़ी 
कभी गुल के मालिक पे बिजली गिरी, 
वो मद्धम महक वो सुवासित हवा 
पहली बूंदो की सारी है जादूगरी ,
जो घिरती है काली घटा बावरी 
तो नदिया तड़पती  है "मुक्तावलि ",
कही  बांध टूटे  कहि घर बहे 
कही  सुखी नदिया भी भरने लगी ,
कही  अग्निवर्षा कहि जल भरी 
कही  मुक्त मर्यादा को तू लांघती ,
तुझे सन्तुलित कर सके जो कभी 
कृष्णा!! बिना कोई होगा नही ,
कभी  मौत! बन कर डराती है तू 
कभी माँ से कोमल बरसती हुयी। 

shikhanaari