राजनीति
अविकसित मानसिकता ने नए "पौधे "लगाए है
फसल की ताक में देखो कई शातिर निगाहे है ,
काश माली को भी होती परख,
फसलो की नस्लो की,
तो शायद बात होती और ही दुनिया के मसलो की
काश कुछ बो सके ऐसा जो कल हम काट पाए ,
कही कल भूख लगने पर हाथ में पत्थर ना आये
कहि ऐसा ना हो ,लहू की प्यास और भड़के
हम अपने हाथ से इंसानियत का खून करदे
फिर अपना ही "शव "अपने कांधे पर उठा कर
अज्ञानवश भारतियता को ही निरमूल कर दे
शिखानारी
फसल की ताक में देखो कई शातिर निगाहे है ,
काश माली को भी होती परख,
फसलो की नस्लो की,
तो शायद बात होती और ही दुनिया के मसलो की
काश कुछ बो सके ऐसा जो कल हम काट पाए ,
कही कल भूख लगने पर हाथ में पत्थर ना आये
कहि ऐसा ना हो ,लहू की प्यास और भड़के
हम अपने हाथ से इंसानियत का खून करदे
फिर अपना ही "शव "अपने कांधे पर उठा कर
अज्ञानवश भारतियता को ही निरमूल कर दे
शिखानारी
