दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Tuesday, 14 March 2017

वक़्त की रेत

                                                               वक़्त की रेत  

लौ बुझते दिए की और मुट्ठी से फिसलती वक़्त की रेत
अनुभव तो बहुत है और सफर अब तक है बाकी ,
बड़ी अद्भुत कहानी ये मेरी जिंदगी भी  
न मयखाने में मदिरा ना मयखाने में साकी ,
        कभी फूलो के गुलशन सा  जो था ये दामन 
कभी अग्नि की वर्षा वहाँ  पर भी हुयी है, 
       कभी सूरज और चंदा  चमकते थे जहाँ 
वहाँ रौशनी की किरण तक भी  नही है, 
  कभी शहनाई की सरगम बजी थी 
कभी हर ख़ुशी की मय्यत उठी है , 
       कभी मुस्कुराहट कभी झटपटाहट 
कई अरमानो की वह बोली लगी है, 
प्यार की बात करना भी गुनाह था जहां पर 
वहाँ कभी विधवा की भी डोली उठी है ,
माँ !हो के भी कभी मैं  माँ ना !बन सकी
खुद की औलाद के  मैं ना सीने से लगी, 
मगर उनके लिए ही मैं दूर उनसे हुयी  
गैर के अंश को मैं पालती  ही रही  , 
ना रही इस जहाँ की मैं  ना ही ,खुदा! की हुयी
सब  समझी नही पर ,कुछ समझ भी गयी, 
ये है किस्मत !की ही मेरी सारी  गड़बड़ी 
ये है मेरे 'कृष्णा "की कारीगरी 
शिखानारी