साथी भी है महफ़िल भी है सुर भी यहाँ, और साज़ भी,
संगीत फिर क्यों गुम सा है जब साज़ मे, आवाज़ भी
क्यों हृद्य मे रुंदन सदा क्यों मर्म भेदी त्रसना,
क्यों अश्रु अविरल आज भी क्यों हर ख़ुशी एक सजा अस्तित्व तक अब मिट चूका तस्वीर भी अब है फ़ना ,
जो प्यार था इकरार था एक त्याग था एक फैसला
वो खो गए वो सो गए हम रह गए बस जागते ,
वो दे गए कुछ दर्द और दर्दे जिंदगी की दास्तान
हम आज तक सब खो के भी हंस के कभी और रो के भी ,
शिकवे किये फ़रियाद भी आई न खुद की याद भी
हम रह गए अनजान हमने खोया क्या ,क्या हमने पा लिया ,
जब वो नही तो कुछ नही अब क्या खुशी क्या जिंदगी
तनहा वो हमको कर गए तन्हा ही हम आज भी ,
हम अजनबी सब अजनबी बस बेबसी ही बेबसी
बस बेपनाह एक दर्द है और नाकाम सी हसरत मेरी।
शिखानारी
