दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Wednesday, 12 November 2014

मैं

मैं 

मैं अनुभूति का एक सृजन मैं अनभिज्ञ नही हूँ

मैं समय मेघ के गर्जन से कम्पित अधरों की जुम्बिश हूँ,

मैं चन्द पँक्तिया विरह गीत या व्यथा कथा नही हूँ

मैं उठती- गिरती लहरो की एक वेग भरी सृष्टि हूँ,
 ,
मैं गलत- सही या अर्थ- अनर्थ में उलझी प्रथा नही हूँ 
,
तुम निर्मल स्वच्छ पवित्र मेघ मैं नीर भरी बदली हूँ,

मैं सहज सरल हंसती गाती निर्मल स्वच्छ नदी हूँ

तुम पावस हो घनघोर सजन मैं युग -युग से प्यासी हूँ,

तुम गुलशन में हो भँम्रर अगर मैं भँवरो का गुंजन हूँ
,
तुम सहज प्रेम की सरल धार मैं तेरी गति का ही स्पंदन हूँ ,
,
तू उमड़ -घुमड़ के बरस रहा मैं अहसासों से भीगी हूँ

ये सोच -सोच की मौसम से तुम आए  हो फिर जाओगे,
 ,
मैं विरह वेदना के डर से अंतर्मन तक कम्पित हूँ,

ओ सख्त बर्फ! को प्रेम ताप से यूं  पिघलानेवाले
 ,
महज पत्थर को शीतल सा नीर बनानेवाले,

मै  नीर- नीर हो कर फिर मेघो से मिलने को आतुर हूँ 
,
मै सजन मेघ से वाष्प रूप में रोज- रोज मिलती हूँ,

फिर घुमड़- घुमड़ के धरती पर बून्द- बून्द गिरती हूँ

तुम इंद्रदेव हो सजन मेरे मैं  बस काली सी बदली हूँ। 
शिखानारी