अभिव्यक्ति! प्रेम की विस्मृत
ओ मेरे रूठे ,हुये "साजन"
अलौकिक ,प्रेम की गुंजन
मन की ,झनकार, अवरोहित ,
वो मेरा प्यार ,अलोपित ,
मेरे सब प्रश्न ?अनुतरित
मैं हूँ, हर पल ही ,आतंकित
क्यों? जीवन प्रश्न हुआ है ????
क्यों/ सृष्टि विनाश अनुमोदित,
हुयी क्या ?भूल है, मुझसे
जो भाग्य ,इस तरह विकृत
मेरे सब प्रश्न? अनुतरित
क्यों? भाव हुए यु ,विक्षिप्त
वो ,कौन है? जो दे देगा,
मेरे सपनो को अमृत
क्या ?यूँही दर्द सहूंगी
क्या? मैं अतृप्त मरूँगी
क्या? सबको अमृत देने को
मैं बस विषपान, करूँगी
क्यों ?प्यार बना है कातिल
क्यों? स्वप्न बने है कांटे
क्यों? घायल मन रोता है
क्यों? प्राण सदा ही बेकल
क्यों? मैं अज्ञान भरी हूँ
क्यों ?सब है ज्ञान त्रिकाली
मैं हूँ हर भाव से बेकल
मैं हूँ हर भाव से खाली
क्यों? अब तक अतृप्ति है
क्यों? शब्द अर्थ से ख़ाली
शिखानारी
