एक सितम और अभी,
वाह!प्यार तेरे सितम तेरी अदा खूब रही है
दोनों हाथो से लूटते है मेरे लिए कहाँ कोई कमी है
एक सितम और अभी,और अभी ,और अभी है,
हमने दामन भी बिछाया है बटोरने को तेरे सितम के मोती
हम भी खुश है क्युकी तेरी ख़ुशी मे ही तो मेरी ख़ुशी है
एक सितम और अभी,और अभी ,और अभी है,
हमने जब साथ उनका चाहा तो तन्हाइया मिली
हमने जब साथ उनका चाहा तो रुस्वाइया मिली
ए खुदा! खैर मेरे लिए उनके पास कुछ तो अभी है
एक सितम और अभी ,और अभी ,और अभी है,
ये है चाहत की हकीक़त उनकी हसरत की कहानी
मेरी आँखों मे अश्क है वो आंख सपनो से है ख़ाली
वो मेरे हो के भी मेरे नही पर मेरे लिए कहाँ कोई कमी है
एक सितम और अभी ,और अभी और अभी है।
शिखानारी
धन्यवाद
