वीरानियाँ
आपने की थी कभी हम पे बेइंतिहा, मेहरबानियाँ
हमने देखी थीं इश्क़ की, बेहिचक बावफ़ा रवानियां
हो रही है देखिये मगर ,अब रोज़ ही कुछ बेईमानियाँ
कर रहे है आप मेरे स्वप्न की कुर्बानियाँ
बाज़ आये हम वफ़ा से , हमको है हैरानियाँ
दिल की महफ़िल राख है , बची सिर्फ है वीरानियाँ
shikhanaari