दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Wednesday, 15 May 2019

ना कर अहसान फिर हम पे  अब ,अब तो मेरी पहचान दे 
ऐ ! जिंदगी तू गुजर गयी ? पर तू थी कभी , ये मान दे 
शिखानारी 

Friday, 19 April 2019

जंगल में आशाओं के कली खिली एक छोटी सी 
हमने देखीं एक खुशी दूर खड़ी  कुछ रूठी सी 
किस्मत की जंजीरे है कुछ पूरी कुछ टूटी सी 
पूरी हसरत हुयी मगर कुछ बिखरी कुछ छूटी सी 
शिखानारी शुभ रात्रि 
हम ठोकरों में है इश्क़ की ,सो मुक़द्दर  आज़माते है 
न समझ कमज़ोर है क्यूंकि ,
हमसे टकराने से पहले , जलजले काँप जाते है 
शिखा नारी 
भीगे नयना  ,सूखे मन 
गहरे बादल ,जलते  तन 
छोटी सी मुस्कान तेरी 
मरू में जैसे मेघ सघन 
मृगतृष्णा ये पावस  है 
तड़पन में ही अब जीवन। 
शिखानारी 

Thursday, 18 April 2019

दो रास्ते   
एक बेबसी ,एक ख़ुदकुशी 
दो हमसफ़र ,
एक मिट गया ,एक आज भी 
दो हसरते 
एक लूट गयी ,एक बर्बाद सी 
एक जिंदगी 
न जी सके ना, आबाद की 
शिखानारी 


जिन्दगी  मेरी ये जैसे ,पूनम में अँधेरा हो 
चाँद हो पूरा पर , बादलो का घना पहरा हो 
तारो की चादर हो ,जिसपर कांटो का बसेरा हो 
बह- बह के लहू मेरा ही ,लफ्ज़ो में मेरे ठहरा हो 
शिखानारी 

दिल है तो दर्द होगा 
दर्द है तो इश्क़ होगा ही
इश्क़ है तो अश्क़ होंगे 
और फिर दोस्तों
 आशिक़ शहीद होंगे ही 
शिखानारी 

सूखते फूलो को चाहिए ,दो बून्द शबनम क्या फ़िज़ा में कुछ नमी बाकी है,अब भी 
इस तरह मत देखिये बे-राब्ता से , क्या मुहब्बत में कुछ कमी बाकी है, अब भी 
शिखानारी

Sunday, 7 April 2019

सरकार किसकी बनेगी,सियासत कौन करेगा
जो ग़म आज ज़िंदा है,वो दिल में ,कल भी रहेगा
पड़ेगा फ़र्क़ आपको ना फ़र्क़ हमको पड़ेगा
जों घर आज तंहा वो तनहा कल भी रहेगा
सूखे पेड़ से छाया या प्यास सुखी नदी से
ना कभी पहले बुझी थी, ना ही वो आज बुझेगी
तमाम उम्र दोस्तों मेरी , ख़्वाबों के मरघट में कटी है
यहाँ ना पहले ख़ुशी थी,ना कभी आगे मिलेगी
Shikha Naari🙏
मनके मन के सारस तन के
बरसे ख़ुशियाँ पावस बन के
बूँदो की हर थाप रिझाये
अहसासों की थिरकन बन के 🙏शिखा

Saturday, 6 April 2019


आज बॉंवरी हो जाऊँ ,अपने कृष्णा में खो जाऊ 
मैं  हूँ बांसुरी मधुर, बोलो क्या मधुर तान छेड़ आऊँ 
मैं  ही तो हूँ जो राधा को कृष्णा के पास ,खींच लाऊँ 
गर्विता, अधर पे कृष्णा के विश्राम मेरा चिर निद्रा तक ,
कोटि पुण्य का ये प्रताप ,श्याम अधर पे मैं ,मोक्ष पाऊं 
मैं  कृष्ण प्रिय,मैं कृष्ण सखी ,मुझ बिन तुम कृष्ण, कहाँ पाओ 
मैं  कृष्णा के अधरों पर उनके हाथो में पाँव धरुं 
फिर सुमधुर तान छेड़े कृष्णा ,मैं उन तानो में नृत्य करूँ  
शिखानारी

Sunday, 24 March 2019

फराग  दिल  नहीं हूँ ,मगर हाँ बावफ़ा  जरूर हूँ ,
 गुफ्तगू के बाद , तुझसे कुछ  गमदीदा जरूर हूँ 
हमनशीं तुम हो नहीं ,  हमसे क्या है राब्ता ?
रात दिन इस फ़िक्र में , डूबी हुयी जरूर हूँ 

Saturday, 23 March 2019

ये धोखा है ,ये साज़िश है ,ये कोई जालसाज़ी है 
भला सच में ,कोई दिल किसी को ,इतना याद करता है .
🙏shikhanaariI

Friday, 22 March 2019

ज़रूरत क्या की उलझो आग से,
जबपता हो जल ही जाना हैं
बेहतर हैं ज़रा बच के निकले ,
आख़िर आपको साथ मेरे दर्द के बस
 कुछ दूर ही तो जाना है🙏
Shikha

हृदय के आकाश में उगा सूरज अनुराग से 
लालिमा और उष्णता हर तरफ़ प्रकाश है
आज जीवित हो उठे बेजान ये अहसास से 
ख़्वाहिशों कि फ़ेहरिस्त में नया एक जज़्बात है
Shikha
Naari


ना  सही इश्क़ की कसमें 
पर मेरा हर ख्वाब वापस कर
ना सही हाथ ,हाथ में कोई,
पर मेरा ज़ज़्बात वापस कर. 
तू लेजा सभी यादे,
मेरा  दिल-ए -बर्बाद वापस कर ,
जिन्हे तूने जगाया था
वो मेरे अहसास वापस   कर 
shikhanaari 
मैं कच्ची माटी कीं गुड़िया 
यूँ अनुभव में दिन रात पकी  
जब आँसू आए आखो में  
तब समझी मैं इंसान 
 Shikha Naari

Wednesday, 20 March 2019

लो सजना, लो ,खेलो होली
गाढा लाल रंग इश्क़ का ,जितना चाहे रंग लगा लो  ,
 पूरा खून निकालो चाहे , हल्का रंग मगर मत डालो ,
ना खेलो होली तुम हम से ,पर तुम मेरा रंग चुरा लो  ,
सात रंग न डालो साजन ,मांग मेरी लेकिन भर डालो ,
सतरंगी सपनो से अपने मैं खुद तुमसे खेलूंगी  होली 
अब क्या रंग चढ़ेगा दूजा सात जन्म जब तेरी हो, ली 
very very colourful HOLI to all
shikhanaari

Monday, 18 March 2019

अनुभव के गुलदस्ते में ,स्मृतियों के है रंग कई 
नहीं महक क्यों फूलो में, ये  टूटे दिल तो फूल नही ?

Tuesday, 5 March 2019

वीरानियाँ 
आपने की थी कभी हम पे बेइंतिहा, मेहरबानियाँ 
हमने देखी थीं  इश्क़ की,  बेहिचक बावफ़ा  रवानियां  
हो रही है देखिये  मगर ,अब रोज़ ही कुछ बेईमानियाँ
कर रहे है आप मेरे स्वप्न की कुर्बानियाँ 
बाज़ आये हम वफ़ा से , हमको है हैरानियाँ 
दिल की महफ़िल राख है , बची सिर्फ है वीरानियाँ 
shikhanaari