सरकार किसकी बनेगी,सियासत कौन करेगा
जो ग़म आज ज़िंदा है,वो दिल में ,कल भी रहेगा
पड़ेगा फ़र्क़ आपको ना फ़र्क़ हमको पड़ेगा
जों घर आज तंहा वो तनहा कल भी रहेगा
सूखे पेड़ से छाया या प्यास सुखी नदी से
ना कभी पहले बुझी थी, ना ही वो आज बुझेगी
तमाम उम्र दोस्तों मेरी , ख़्वाबों के मरघट में कटी है
यहाँ ना पहले ख़ुशी थी,ना कभी आगे मिलेगी
Shikha Naari🙏
जो ग़म आज ज़िंदा है,वो दिल में ,कल भी रहेगा
पड़ेगा फ़र्क़ आपको ना फ़र्क़ हमको पड़ेगा
जों घर आज तंहा वो तनहा कल भी रहेगा
सूखे पेड़ से छाया या प्यास सुखी नदी से
ना कभी पहले बुझी थी, ना ही वो आज बुझेगी
तमाम उम्र दोस्तों मेरी , ख़्वाबों के मरघट में कटी है
यहाँ ना पहले ख़ुशी थी,ना कभी आगे मिलेगी
Shikha Naari🙏