बहके हुये हालात ,और उड़ते हुये बादल ये
उलझी हुयी जुल्फे और ये भीगे हुए आंचल
ऐसा ना हो लम्हात ये कर जाये हमे घायल
बेमौसम की बहारे कहि खोले ना दरवाज़े
ऐसा ना हो मेहमान कोई बिन पूछे चला आये
वो दिल में घर बना ले ,बंजर में डेरा डाले
हम कुछ भी ना कर पाये ,वो ना हमको कही मना ले
🙏शिखानारी