इन अश्क़ो के मोती ले कर ,मेरा तुम श्रृंगार करोगे ,
अहसासों से मुझे सजा कर ,फिर लफ्ज़ो से वार करोगे,
यादो का दरीचा जीवन , इसमें कैसे प्यार भरोगे ?
दर्द भरी ग़ज़ल में कैसे ,इश्क़ भरे अशरार भरोगे ?
मुझ दुल्हन की साजन बैरी,तुम तंजो से मांग भरोगे।
मैं चिंगारी बुझी हुयी हूँ बोलो ना कैसे, प्रेम दीप तैयार करोगे।
लौट भी जाओ नामुमकिन है,फिर मत कहने प्यार करोगे।
शिखानारी
