लोग
अजब से लोग देखे है, अजब सी दोस्ती इनकी
जरूरत भी नहीं फिर भी, हाथ में हाथ रखते है ,
सुकून दे कर गहरी ,दुश्मनी भी साथ रखते है
कुछ लम्हो के बदले,हर ख़ुशी पर आँख रखते है,
नावाकिफ है राग से पर, हाथ में साज़ रखते है
इश्क़ के जख्म पर मलहम जो माँगा ,तब कही जाना ,
ये मासूम रहबर जुबाँ पे ,जहर की तलवार रखते है.
शिखानारी
