खामखा
हवाओ में बन के फ़िज़ा खो गए ,
ज़माने से उनके निशा खो गए
जो बाकि बचा बस धुआँ ही धुआँ ,
जो गुज़री है हम पे करे क्या बयां
जो आशिक़ थे इश्क़े खुदा बन गए,
बींमार दिल की इस दवा बन गए
जिन्हे देखने की हसरत में जीये ,
वो सिर्फ तस्वीर-ए-बुताँ बन गए
फक्त पा सकेंगे उनको दुआ में,
नयन मेरे उनकी ख्वाब गाह बन गए
लोग कहते है वो एक अहसास है ,
हम चाहत में उनकी खामखा मर गए.
शिखानारी
