दुश्मनी
बाते तो बहुत है ,जो तुमको बताऊ
बहुत है फ़साने जो तुमको सुनाऊ
मगर तुमको अपना तो समझू
पहले ज़रा अपने दिल को मनाऊ
तुम्हारी जफ़ाएँ छुपाऊ तो कैसे
नया कोई धोखा खाऊ तो कैसे
टुकड़े अभी तक जमीन पे पड़े है
दिल पे खंजर फिर से चलाऊ तो कैसे
सितम सारे बोलो भुलाऊ तो कैसे
लबो पे मुहब्बत लाऊ तो कैसे
निगाहो से नफरत मिटाऊँ तो कैसे
बेहतर यही है चले जाओ यहां से
नफरत मेरी तुमको जला ही ना डाले
अपनी दुश्मनी से तुमको बचाऊँ तो कैसे
shikhanaari
