कुदरत
आपने कितने सारे प्रश्न पूछ डाले
ना हसरत से तकना ,ना यूँ मुस्कुराना
कही कोई बन के ना बिखरे दीवाना ?
अगर बात ये है तो ,पूछो पवन से
की वो क्यों सुनाती है चाहत का गाना,
ये फूलो की खुशबु ,ये शबनम के मोती
क्यों ये सुबह किरणों से मुँह को धोती ,
कैसे ना जागेगी कोई हसरत किसी की
कैसे छुपायेंगे ये हम मुस्कुराना ,
कैसे बनाये किसी को दीवाना जो
जो डूबा हुआ हो नशे में पवन के
उसे होश होता कहाँ ,क्या छुपाना
नज़ारो का हो जो कुदरती सा दीवाना
उसे होश होता कहाँ ,क्या छुपाना
नज़ारो का हो जो कुदरती सा दीवाना
शिखा नारी
