सपना
हृदय के स्पंदन में कम्पन आपसे है प्रेम वंदन
नई सुबह की ये घड़ी है खुशियों का जैसे आलिंगन ,
झंकृत अहसास जैसे पायलो से बज रहे हो
चूडियो की खनक से ख्वाब जीवित चल रहे हो ,
आप से ये मिलन खूबसूरत सच्चा सा सपना
सारी बाते हो जैसे सुमधुर संगीत कोई ,
साज़ हम बन गए हो तुम हो जैसे गीत कोई
तुम अलाप बन गये और मैं बनी हूँ अंतरा,
कोई मुझको मत जगाना नींद में भी डर है बड़ा
फिर नाआज जाग जाए ,सपना न हो फिर पूरा मेरा।
शिखा नारी
