क़र्ज़
अनुभवों के आग से पकाया है
ये जीवन हमने यूँ ही नहीं गवाया है ,
चोट खायी है ,दिल लगाया है
हमने भी बेवफाई का पूरा मज़ा उठाया है ,
दिल के टुकड़ो को हमने भी
कई बार तोडा है फिर बनाया है,
बहुत दर्द पाया कभी, प्यार भी
रिश्तो की माला दुश्मनी के हार भी,
अपने अश्क़ो को हमने कई बार
खुद से भी छिपाया है,
हम ने मुस्कुरा के हर धोखे को गले लगाया है
खुद हाथ में खंजर दे कर दुश्मन को,
खुद अपना पता बताया है
मौत आनी ही है तय है तो, फिर डर क्या ,
अपना कफ़न खरीद के खुद ही
अपनी लाश पे चढ़ाया है ,
मैंने क़र्ज़ दुःख दर्द और बेबसी का
अपनों के सर चढ़ाया है।
shikhanaari
