रिश्तो का घोटाला
सूरज का मुँह काला देखा
हमने कहाँ उजाला देखा,
हो गयी कलुषित लक्ष्मण रेखा
लक्ष्मण ने सीता को देखा ,
अब ममता के गीत कहाँ है ?
रिश्तो में अब प्रीत कहाँ है?
दुनिया अब बदली बदली है
जीवन में संगीत कहाँ है ?
जिन हाथो में प्रेम दीप था
नगर वधु का प्याला देखा,
जोगी और भोगी में अंतर्
हम समझे ना समझा पाए ,
अपने अपने सुख की खातिर
रिश्तो का घोटाला देखा
अपना महल बनाने को
भाई की छाती में खंजर,
अपना गुनाह छुपाने को
सिंदूर बहन का पोछ दिया ,
खुद सूरज बनके चमके,
और
माँ के आँचल से लोगो ने
जीवन के हर कचरे को पोछ दिया ,
कहाँ रही अब मानवता जब
बेटो ने दशरथ को वनवास दिया ,
राम नहीं बन पाए पर
रामायण को पापो की महारानी
श्रुपनखा से जोड़ दिया
आगे बढ़ने की चाहत में
आज के सीता रामो ने
हर मर्यादा को तोड़ दिया
अपना महल बनाने को
भाई की छाती में खंजर,
अपना गुनाह छुपाने को
सिंदूर बहन का पोछ दिया ,
खुद सूरज बनके चमके,
और
माँ के आँचल से लोगो ने
जीवन के हर कचरे को पोछ दिया ,
कहाँ रही अब मानवता जब
बेटो ने दशरथ को वनवास दिया ,
राम नहीं बन पाए पर
रामायण को पापो की महारानी
श्रुपनखा से जोड़ दिया
आगे बढ़ने की चाहत में
आज के सीता रामो ने
हर मर्यादा को तोड़ दिया
शिखा नारी
