पिपासा
है दर्द जख्म जागीर मेरी और,नाम मेरा जिज्ञासा है,
जब दर्द भरी गागर छलकी जल, सुख गया पिपासा है
ओह! निष्ठुर मन मालूम न था कोई और भी है जो प्यासा है,
हर तरफ जहॉ मातम पसरा हर ओर वहां अभिलाषा है
थी जाम भरी मादक बेला और मन भी था मैला मैला,
हम टूट गए वो लूट गए अब प्यार का हुआ खुलासा है
बाकि नहीं बचा कुछ भी, ना आशा और निराशा है ,
खुश है इसलिए दोस्तों क्यूंकि ! हमने खुद ही ये दर्द तलाशा है
हम जान गए जग इश्क़ मुश्क ये,सब कुछ एक छलावा है ,
अब वो भगवान बने सबके और हस्ती मेरी, दुष्पर्शा है
मेरी मंशा प्रत्याशा मेरी अब सिर्फ और सिर्फ तमाशा है ,
अब नहीं दिखती तस्वीर मेरी हर तरफ
फैला यादो का गहन कुहासा है
शिखानारी ।
अब नहीं दिखती तस्वीर मेरी हर तरफ
फैला यादो का गहन कुहासा है
शिखानारी ।
