"पागल"
ऐसे भी रिश्ते होते है जो मन में, जगते रहते है
निराकार बिन नाम के हो के भी बस ये ही, अपने होते है ,
हम उनके होने की आहट, बस दिल में सुनते रहते है
वो ना कभी हमे पुकारे ना मुझ पर अधिकार दिखाये,
पर मैं हंस दू तो हँसते है और, वरना चुप ही रहते है ,
फ़क्त! दर्द, मेरा सहने को वो सबसे आगे रहते है
मेरा सारा "दर्द चुरा के कांटो पर चलते रहते हैं ,
मेरी अदना ख़ुशी की खातिर खुद को ,मेरा ही दुश्मन कहते है,
दूर अकेले तन्हा -तनहा मुझको बस देखा करते है ,
उनको साजन! नाम ना देना खुद को वो पागल कहते है ,
वो जाने या मैं जानू प्यार छुपाना क्या होता है
मैं " उनको "अपना" जो कह दू मुझको भी "पागल कहते है ,
उनकी ना हो पायी मैं पर ये रिश्ता तो जग जाहिर है ,
मै भी "पागल", वो भी "पागल"
आखिर "पागल"-"पागल"" तो अहसासों में एक होते है
शिखानारी
शिखानारी
