इल्तज़ा
है हक़ीक़त वही जज्बे जो, नजरो से बया हो ,
बनो ना तुम कहानी ना, मुझको खबर बनाओ
इतनी सी इल्तज़ा है इस दिल, से चले जाओ,
मुझको करो ना रुसवा ना ,तुम इलज़ाम उठाओ
तन्हा ही हम जियेंगे ना ,तुम ख्वाब दिखाओ,
पतझड़ में गुल खिला तो, बदनाम बाग़ होगा
बिन माली के गुलिसतां, कैसे आबाद होगा ,
जीवन के इस सफर में ,तसव्वुर में साथ रहना
यही बस एक मेरा शायद एक सच्चा, ख्वाब होगा ,
क्यों करके झुठे वादे ,तड़पा रहे हो मुझको
इस शांत से सफर में बहका , रहे हो मुझको ,
मेरा दिल नही खिलौना ,ये भी खेल तेरा होना
तुम रुवाइयो का मंजर ,धोखा है तेरा होना ,
तुम बात तो करते हो ,दिल से भी गुजरते हो
मन्दिर में मुहब्बत के, फरियाद भी करते हो ,
मेरे गम को भी सहते हो ,इस दिल में भी रहते हो
क्यों तुमको मेरी चाहत ,बस ये नही कहते हो ,
तूने पोछे मेरे आंसू शाने को चुम के
बस गुम हुआ मेरा दिल बैठे थे ,टूटा दिल हाथ में लिए।
शिखानारी
शिखानारी
