तनहा -तनहा रहते -रहते पतझड़ के कई जमाने देखे
पलको पर आंसू देखे और होठो पर मयखाने देखे ,
सारी दुनिया ना समझी कुछ, ऐसे राज़ पुराने देखे
जब चाहा दिल से खेला जब चाहा नाकार दिया ,
जब चाहा बाहो में ले कर अपना सब कुछ हार दिया
देखे दुश्मन बहुत मगर कुछ ऐसे दोस्त दीवाने देखे ,
आँखों में फरेब का पर्दा भोले बन बईमान रहे,
हैवानो की इस दुनिया में इज़्ज़त के दीवाने देखे
बुझती शमा को पिघला दे कोई ख्वाहिश रोज जगा दे ,
रोज ही तोड़े टूटे दिल फिर कोई सपना रोज सज़ा दे
सूरत से नादान फ़रिश्ते , खतरनाक परवाने देखे,
भोली -भाली शक्लो में दहशत के अफ़साने देखे
धोखा देनेवाले हमने अपने और बेगाने देखे।
