दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Tuesday, 14 March 2017

मक्कार

मक्कार

वादों के इरादों के ,रस्मो के रिवाज़ों के 
हम देखते है बदले किस्से इन समाजो के, 
खुद मंजनू के हाथो में लैला के कटे सिर है 
हीरों ने जहर दे कर खुद ही राँझों को सुलाया है ,
इश्क़ के हाथो में अब धोखो का ख़ंजर है 
खुदगर्ज़ी का नशा यारो इस नस्ल पे छाया  है, 
है जुर्म इश्क़ करना है ,पाप वफ़ा करना 
कसमो को निभाना और उल्फत है, गुनाह करना ,
टुकड़ो में टूट कर  रोता था सिसकता था 
वह शीशा नही है अब दिल श्रगाल, (सियार)बन गया है ,
मासूम नही अब ये ,अब ये मक्कार बन गया है
 रोता  नही है अब ये रणनीति ,बनाता है ,
अपने शिकार को ये वादों से फसाता है 
ऐतबार का कत्ल कर ये बस, जीत के ही आता है.
शिखानारी