बिखर रही हूँ लम्हा-लम्हा ,मोती सा चुन लो ना
तुम मेरे अहसासों से एक ,चादर सी बुन लो ना
इस चादर में प्रियतम ,वादों के फूल सजाओ
एक चुटकी सिंदूर माँग में, घूँघट सा मुझे उढाओ
जीवन मेरा हुआ अमावस ,तुम चंदा बन जाओ
सारी रस्में प्रेम दीप में बाती बना ,जलाओ
एक बार बस अपना कह दो ना फिर चाहे ना आओ