दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Thursday, 22 March 2018

कविता

कविता 
दोस्त मुझे कविता कहते है ,मुझको खुद रचते रहते है 
छोटी बड़ी बात कोई हो ,दुःख सुखका अहसास कोई हो ,
शब्दों के फंदो में नए -नए आरोप लगा कर ,नए दर्द बुनते रहते है 
कविता की दुशालाओ से ,झूठे जज्बातो को ढकते रहते है ,
कभी हाथ ले कर हाथो में ,बे मतलब हसते रहते है 
और कभी दुशाला में छिप कर ,शब्दवार करते रहते है ,
मैं निर्मल मन समझ ना पाऊं ,हाथ पकड़ बस बढ़ती जाँऊ 
खुद ही दे पतवार हाथ में ,कश्ती में बैठा देते है ,
खुद ही फिर कश्ती को ,तूफान के सम्मुख करते है 
ताउम्र हाथ में जाम उठा फिर,मातम भी करते रहते है ,
हम सबसे डरते रहते है ,और अब ,खुद-खुद पे कविता कहते है 
🙏शिखा नारी ❤️💕❤️