क्या है ???
ऐ खुदा! तेरी दुनिया का ये, मंजर क्या है ?
कही विश्वास कही पीठ में ,खंज़र क्या है ?
सुना है, तू हर ज़र्रे में छुपा रहता है
तो फिर इस जमी पे, कही मंदिर कही मस्जिद क्या है ?
जब इन मुल्को में, बसनेवाले सभी बंदे है तेरे
तो फिर ,कोई दुश्मन कोई रहबर क्या है?
तेरा वज़ूद, जो बाबस्ता है यहाँ हर शैय में ,
तो कही पक्की फसल और कही जमी बंजर क्या है?
कहते है तू सबको प्यार करता है ,
तो फिर, कोई बदनसीब कोई मुक़द्द्र का सिकंदर क्या है ?
शिखानारी