दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही

दिल है तो दर्द होगा दर्द है तो इश्क़ होगा ही इश्क़ है तो अश्क़ होंगे फिर आखिर आशिक़ शहीद होंगे ही
दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो इश्क़ होगा ही ,इश्क़ है तो अश्क़ होंगे , फिर आशिक़ शहीद होंगे ही.

Thursday, 30 March 2017

राब्ता

राब्ता


वाह!रे मासूमियत मेरे कातिल की, 
पीठ में खंजर चुभा कर आह भरते है ,
खून मेरा देख कर वो चीख! पड़ते है, 
बन्द करते है अपनी वो आंखे, 
खुद के दिए जख्म की गहरायी देख कर, 
दुश्मनो के काँधे पे  रख कर सर,
  उफ़ ! देखो कैसे वो  सिसक पड़ते है। 
हमको पर देते नही इज़ाज़त दर्द !में आह" भरने की ,
उस  पे नुक्ता ये की हमारे आँसूओ से वो सिहर उठते है ,
लोग पूछते हैं उनसे खुद हमारे जख्म की वजह 
वो बताते हैं, की हम नाज़ुक है !यूँही आह भरते हैं ,
किसको दिखाए जख्मी दिल किसका नाम ले ?
वो  जानते है खूब हम उनसे प्यार करते है ,
हम भी बस चुप- चाप यूँही मुस्कुराते है, 
वह मेरे कातिल इसी बहाने, सौ- सौ बार मेरा नाम जपते है, 
लोग शातिर है समझ लेंगे ये दर्दे दिल, 
ये हमारे  मासूम अजनबी क़ातिल 
हमसे कुछ ना कुछ 
राब्ता" तो रखते है 
शिखानारी